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तीन तलाक बिल पास: मिलिए, उन मुस्लिम महि‍लाओं से जिन्होंने लड़ाई लड़ी, इसका दंश भी झेला.

नई दिल्लीः तीन तलाक बिल लोकसभा और राज्यसभा से पास हो गया. राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह बिल कानून बन जाएगा. तीन तलाक कुप्रथा की मार झेल रही महिलाएं इस बिल के पास होने से सबसे ज्यादा खुश हैं. पीड़ित महिलाओं ने हर जगह गुहार लगाई. हर किसी को अपनी व्यथा सुनाई लेकिन किसी ने इन फरियादियों पर विचार नहीं किया. न तो किसी धर्म गुरु ने साथ दिया और न ही समाज के लोगों ने इस कुप्रथा को लेकर विरोध जताया. लोग इन मामलों में दोष महिलाओं के सर मढ़ते रहे. महिलाओं को ही समझाते रहे.
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सायरा बानो से लेकर नाजिया और फूलबानो से लेकर शहनाज जैसी न जाने कितनी महिलाएं इस कुप्रथा की भेंट चढ़ गईं. ये महिलाएं फंस गईं समाज के उस दलदल में जहां से निकलने के प्रयास में और अंदर धंसती गईं. समाज में फैली इस सड़ांध को खत्म करने के लिए यूं तो कई महिलाएं और सामाजिक संगठनों ने रोल अदा किया. लेकिन, सबसे अहम रोल पीड़ित सायरा बानो का है. पति से तीन तलाक मिलने के बाद उन्होंने इंसाफ के लिए हर उस दरवाजे पर गुहार लगाई जिससे वह उम्मीद पाले बैठी थीं. लेकिन उनको उन दरवाजों से सहानुभूति के बदले दुत्कार मिली.

सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को बताया असंवैधानिक

समाज से दुत्कार और जमाने से ठोकर खाने के बाद सायरा बानो ने सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर पहुंचीं. सुप्रीम कोर्ट में इसकी लंबी सुनवाई चली. अंत में इस कुप्रथा को असंवैधानिक करार दिया गया. कोर्ट के फैसले से पहले न जाने कितने महिलाएं इस कुरीति की भेंट चढ़ गईं. न जाने कितने पिता ताउम्र अपनी बेटी और न जाने कितने भाई अपनी बहन की इंसाफ के लिए जवानी बर्बाद कर दी. ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि तीन तलाक की भेंट चढ़ी महिलाओं पर क्या गुजरा? कैसे अपनी जिंदगी काटी? न जाने कितने जख्म सहे? आज आप खुद सुनिए उन महिलाओं की जुबानी-

सायरा बानो की जुबानी

सायरा बानो- शुरू से मेरे ससुराल वाले परेशान करते थे. मेरे पति भी मुझे बहुत परेशान करते थे. मारपीट करते थे. उसी दौरान मैं दो बच्चों की मां बनी. मेरे पति मुझे लेकर अलग रहने लग गए ससुराल से. उनका रवैया लगातार वैसा ही था. वह मुझे किसी से मिलने जुलने भी नहीं देते थे. उसके बाद मैं जुल्म सहते सहते कमजोर हो गई. एक दिन अचानक मुझे चिट्ठी के जरिए तलाकनामा भेज दिया. सायरा बानों का कहना है कि तलाक के बाद उन्होंने इंसाफ की ठानी और फिर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाज़ा खटखटाया. हालांकि, उनका कहना है कि उनके लिए ये लड़ाई इतनी आसान नहीं रही, बल्कि उसे काफी मशक्कत करनी पड़ी.

नाजिया की कहानी

सहारनपुर यूपी की रहने वाली नाजिया खान बताती हैं कि उनके पति डॉक्टर हैं. दहेज मांगते थे शादी के बाद. प्रताड़ित करते रहे दहेज के लिए. नहीं मिला तो घर से बाहर निकाल दिया. परेशान होकर मुकदमा दायर किया. जिसके बाद उन्होंने मुझे कागज पर लिख कर तीन तलाक दे दिया.

फूलबानो की कहानी

यूपी के आगरा की रहने वाली फूलबानो जब अपनी दास्तां सुनाती हैं तो ऐसा लगता है जैसे उसकी फूल सी जिंदगी कांटो के सफर पर कट रही हो. मेरा पति न तो मुझे कुछ खाने को देता न कुछ पीने को. मैं प्रताड़ित होती रही. सब सहा लेकिन अंत में मुझे तीन तलाक बोलकर तलाक दे दिया.

शहनाज भी है पीड़ित

यूपी की ही रहने वाली शहनाज भी इससे पीड़ित हैं. वह बताती हैं कि शादी के छह महीने बाद ही दहेज की मांग शुरू कर दी. मुकदमा दर्ज हुआ. कोर्ट में सुनवाई के बाद बाहर निकले और मुझे मौखिक तौर तीन तलाक दे दिया. ये कहानी सिर्फ किसी एक महिला की नहीं है. यह कहानी देश में उन हजारों महिलाओं की है जो इससे पीड़ित हैं. कई ऐसी दर्दनाक कहानियां भी जिसे सुनकर हर कोई हैरान हो जाता है.

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