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पाकिस्तान: परवेज मुशर्रफ ने भारत के खिलाफ फिर उगला जहर, कहा- हम कश्मीरी लोगों के साथ खड़े हैं

इस्लामाबाद: बीमार पूर्व सैन्य तानाशाह परवेज मुशर्रफ ने फिर से पाकिस्तान की सक्रिय राजनीति में लौटने का फैसला किया है. राजनीति में लौटने के साथ ही उन्होंने कश्मीर का राग अलापा. मुशर्फ ने कहा कि कश्मीर पाकिस्तान के खून में है और कुछ भी हो जाए, सेना के साथ देश कश्मीरी लोगों के साथ खड़ा रहेगा.
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दुबई में रह रहे जनरल (सेवानिवृत) मुशर्रफ ने करगिल संघर्ष का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि पाकिस्तान के शांति प्रयासों के बावजूद भारत उसे बार बार धमकी दे रहा है. उन्होंने कहा, ‘‘शायद, भारतीय सेना कारगिल की लड़ाई भूल गयी है.’’ मुशर्रफ ने इस दौरान खूब झूठ बोले. ऑल पाकिस्तान मुस्लिम लीग के 76 वर्षीय अध्यक्ष मुशर्रफ ने रविवार को पार्टी के स्थापना दिवस पर दुबई से टेलीफोन से इस्लामाबाद में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 1999 में इस संघर्ष को समाप्त करने लिए भारत को अमेरिकी राष्ट्रपति से मदद मांगनी पड़ी थी. मुशर्रफ ने अपने बिगड़ते स्वास्थ्य के चलते पिछले साल राजनीतिक गतिविधियों से अवकाश लिया था. भारत सरकार द्वारा पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त किए जाने के बाद दोनों देशों के बीच बिगड़ते संबंधों के बीच संभवत: उनकी पहली टिप्पणी है. मुशर्रफ ने कहा, ‘‘ चाहे जो भी हो, हम अपने कश्मीरी भाइयों के साथ खड़ा रहेंगे.’’

भारत द्वारा पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर के विशेष राज्य का दर्जा वापस लेने के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बहुत बढ़ गया है. पाकिस्तान ने भारत के साथ अपना राजनियक संबंध घटा दिया और भारतीय उच्चायुक्त को वापस भेज दिया. भारत ने कहा है कि अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को समाप्त करना उसका अंदरूनी मामला है. भारत ने पाकिस्तान से इस सच्चाई को स्वीकार कर लेने और भारत विरोधी प्रलाप बंद करने को भी कहा है. मुशर्रफ मार्च, 2016 से दुबई में रह रहे हैं और वर्ष 2007 में संविधान को स्थगित करने को लेकर राजद्रोह के मामले का सामना कर रहे हैं. उन्हें इस मामले में 2014 में अभ्यारोपित किया गया. राजद्रोह के मामले में दोषी करार देने पर मृत्युदंड या उम्रकैद का प्रावधान है. साल 1999-2008 तक पाकिस्तान पर शासन करने वाले मुशर्रफ को बेनजीर भुट्टो हत्याकांड और लाल मस्जिद हत्या मामले में भगोड़ा घोषित किया गया है.


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