जानिए कोरोना पीड़ितों की स्कैनिंग को प्रयोग होने वाली थर्मल गन कैसी करती है काम? - Journalistdelhi.tv
 
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जानिए कोरोना पीड़ितों की स्कैनिंग को प्रयोग होने वाली थर्मल गन कैसी करती है काम?

नई दिल्ली: देश में कोरोना वायरस का कोहराम लगातार जारी है. आज देश में कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या 500 से अधिक हो गई है. वहीं इसकी वजह से अब तक 11 लोगों की देश में मौत हो चुकी है. इस जानलेवा वायरस से लोगों के बचाने के लिए देश के लगभग हर राज्य में या तो लॉकडाउन चल रहा है या फिर कर्फ्यू लगा दिया गया है. हालांकि अभी उड़ानों, रेलगाड़ियों और बसों को रद्द किया गया है. लेकिन पहले रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट पर लोगों की थर्मल स्कैनिंग की जा रही थी. जानिए स्कैनिंग के लिए प्रयोग की जाने वाली थर्मल गन कैसे काम करती है.
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इंफ्रारेड के जरिए काम करती है थर्मल गन

थर्मल गन जिसे थर्मामीटर गन और इंफ्रारेड थर्मामीटर के नाम से भी जाना जाता है. यह मुख्यत: थर्मामीटर ही होता है. जो लोगों के बिना संपर्क में आए तापमान बता देता है. चूंकि कोरोना वायरस के कारण थर्मामीटर का प्रयोग मुमकिन नहीं है. इसीलिए इस गन का प्रयोग किया जाता है. यह गन इंफ्रारेड के जरिए काम करती है. लगभग एक फुट की दूरी से ही यह आपके शरीर का तापमान डिजिटल डिस्पले पर दिखा देती है. आपको बता दें कि यह गन कोरोना की संक्रमितों की पुष्टि नहीं करती है. लेकिन तापमान के आधार पर संभावितों के बारे में जानकारी देता है.

हालांकि एक्सपर्ट का मानना है कि थर्मल गन कभी-कभी रिजल्ट गड़बड़ भी कर देती है. एक्सपर्ट बताते हैं कि अगर कोई व्यक्ति गुस्से या तनाव में है या फिर खेल कर आ रहा है तो यह गन उसका तापमान अधिक बता देती है. जो कि उस दौरान बढ़ा ही हुआ होता है. इसीलिए कोरोना के मामलों में थर्मल स्कैनिंग के बाद भी पूरी पुष्टि के लिए दोबारा जांचे की जाती हैं. कोरोना वायरस के कोहराम के बीच इस गन के जरिए अधिक तापमान वाले लोगों को भीड़-भाड़ वाले इलाकों जैसे एयरपोर्ट, दफ्तर, रेलवे और बस स्टेशन आदि से अलग कर के आगे की जांचे की जा रही हैं. उसके बाद उन्हें आइसोलेशन के लिए कहा जा रहा है.


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